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कालिया नाग और भगवान श्रीकृष्ण कथा ( एक नई सोच ) / कालिया नाग मर्दन Krishan Leela
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By Komal
Ved-Virasat
कालिया नाग और भगवान श्रीकृष्ण कथा / कालिया नाग मर्दन :- वेदों में वर्णित श्लोको का ज्ञान जो आम लोगों की समझ से परे थे उसको समझाने के लिए महर्षि वेद व्यास जी ने पुराणों की रचना की और अलग अलग कथाओ के माध्यम से वेदों का ज्ञान जन जन तक पहुचाया| ऐसी एक घटना है भगवान श्रीकृष्ण और कालिया नाग के बीच के युद्ध की है जिसमे भगवान विषेले 1000 मुखो वाले कालिया नाग से सर पर सवार होकर उसका मर्दन करते है और उसको कालिंदी(यमुना) जैसी पवित्र नदी को छोड़ने पर विवश कर देते है | स्वभाव से तो कालिया था तो साँप ही इसमें उसकी भी कोई गलती नही थी क्योंकि प्रकृति ने उसे ऐसा ही बनाया है उसका काम, स्वभाव ही लोगों को डसना और जहर उगलना है जैसे हमारे आस पास लोग होते है जिनका स्वभाव ही ऐसा होता है हम चाहे लाख कोशिश करले लेकिन उनके स्वभाव को बदल नही सकते| अब अगर वो कालिया नाग हमारे मन और बुद्धि को लगातार क्षति पहुचा रहा है तो जरूरी हो जाता है कि उसकी विवशता को समझते हुए दया भाव के साथ उसका मर्दन किया जाए और ऐसा रास्ता निकाला जाए जो दोनों के लिए हितकारी हो | कालिया नाग कौन है ? ...
विष्णु सहस्त्रनाम 1000 नाम Lord Vishnu 1000 Names with Hindi meaning thrusday vishnu mantra
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By Komal
Ved-Virasat
विष्णु सहस्त्रनाम मंत्र 1000 names of Lord Vishnu विष्णु सहस्त्रनाम में विष्णु भगवान के 1000 नामो का वर्णन है इसके अंदर 108 श्लोक है| इसकी रचना महर्षि वेदव्यास जी ने की थी | इसका रोज जाप करने से खासकर वीरवार को इसका जाप करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है | यह हिंदू धर्म के सबसे प्रचलित और शुभ श्लोको में से है | इसका वर्णन महाभारत के अनुसासन पर्व में मिलता है जब बाणों की शैया पर लेते भीष्म से मिलने युधिस्ठिर आते है तब भीष्म उनको धर्म का नीति का ज्ञान देते हुए इसकी महिमा का वर्णन करते है| ज्योतिष में विष्णु सहस्त्रनाम के जाप के लाभ हमारे अन्तरिक्ष में बहुत से तारे, गृह(नवग्रह) और 27 नक्षत्रो का समूह है| इनमे से कुछ तो घूमते है और कुछ अपनी जगह पर स्थिर रहते है| जब भी कोई बच्चा जन्म लेता है उस समय उन ग्रहों और तारो की आकाश में कता स्थिति थी उसी के आधार उस बच्चे की कुंडली बनती है| जैसे जैसे इन ग्रहों का जगह बदलती है जिसे गोचर कहते है व्यक्ति के जीवन में अलग अलग बदलाव आते है जिसका अनुमान ज्योतिषी लगाते है| ज्योतिषी में भी विष्णु सहस्त्रनाम के जाप का बहुत अध...
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सम्पूर्ण स्वस्तिवाचन हिंदी में स्वस्ते ना इन्द्रो का हिंदी अनुवाद Swastivachan Mantra
By Komal
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संपूर्ण स्वस्ते ना इन्द्रो मंत्र स्वस्तिवाचन स्वस्ति वाचन (मंगल पाठ) शांति पाठ हिंदी अनुवाद सहित :- हिंदू धर्म में प्राचीन परंपरा रही है की जब कभी भी हम कोई शुभ कार्य आरम्भ करते है तो उसके सफल होने के लिए भगवान से मंगलकामना करते है कि वो कार्य सिद्ध हो | हिंदू धर्म के जितने भी वेदों में ऋचाये या मंत्र है उनको सही से बोलने से दिव्य शक्ति प्राप्त होती है और मन शांत होता है | किसी भी शुभ कार्य को प्रारम्भ करते, विवाह , पुत्रजन्म, मकान की नीव स्थापना और सनातन धर्म के षोड्स सस्कारों को करते समय स्वस्तिवाचन किया जाता है | स्वस्तिवाचन का दैनिक नित्य पूजा कर्म मे भी पाठ कर सकते हैं | स्वस्तिवाचन जीवन में नेगेटिव ऊर्जा को दूर कर सकारात्मकता की ओर ले जाता है | जिस प्रकार स्वास्तिक सभी प्रकार के वास्तु दोष समाप्त कर देता है , वैसे ही स्वस्ति वाचन से सभी प्रकार के पूजन दोष समाप्त हो जाते हैं। हिंदी अनुवाद की जरूरत क्यों है? मानव जीवन को बेहतर बनाने के ऋषियों ने जो वेदों , ग्रंथो , उपनिषदों , पुराणों की ऋचाओ, मंत्रो की रचना की और उसी आधार पर हिंदू धर्म के व्रत, ...
विष्णु सहस्त्रनाम 1000 नाम Lord Vishnu 1000 Names with Hindi meaning thrusday vishnu mantra
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विष्णु सहस्त्रनाम मंत्र 1000 names of Lord Vishnu विष्णु सहस्त्रनाम में विष्णु भगवान के 1000 नामो का वर्णन है इसके अंदर 108 श्लोक है| इसकी रचना महर्षि वेदव्यास जी ने की थी | इसका रोज जाप करने से खासकर वीरवार को इसका जाप करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है | यह हिंदू धर्म के सबसे प्रचलित और शुभ श्लोको में से है | इसका वर्णन महाभारत के अनुसासन पर्व में मिलता है जब बाणों की शैया पर लेते भीष्म से मिलने युधिस्ठिर आते है तब भीष्म उनको धर्म का नीति का ज्ञान देते हुए इसकी महिमा का वर्णन करते है| ज्योतिष में विष्णु सहस्त्रनाम के जाप के लाभ हमारे अन्तरिक्ष में बहुत से तारे, गृह(नवग्रह) और 27 नक्षत्रो का समूह है| इनमे से कुछ तो घूमते है और कुछ अपनी जगह पर स्थिर रहते है| जब भी कोई बच्चा जन्म लेता है उस समय उन ग्रहों और तारो की आकाश में कता स्थिति थी उसी के आधार उस बच्चे की कुंडली बनती है| जैसे जैसे इन ग्रहों का जगह बदलती है जिसे गोचर कहते है व्यक्ति के जीवन में अलग अलग बदलाव आते है जिसका अनुमान ज्योतिषी लगाते है| ज्योतिषी में भी विष्णु सहस्त्रनाम के जाप का बहुत अध...
ऋषि याज्ञवल्क्य - मैत्री संवाद बृहदअरण्यक उपनिषद् ( आत्मा वा अरे द्रष्टव्यः )
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महर्षि याज्ञवल्क्य मै त्री संवाद बृहदअरण्यक उपनिषद् :- मैत्री वैदिक काल की महान विदुषी जिसने आत्मा और ब्रह्माण्ड के एक होने को लेकर संवाद उपनिषद में मिलता है की अद्वैत दर्शन शास्त्र का मूल स्तम्भ है | मैत्री को प्राचीन संस्कृत साहित्य में ब्रह्मवादिनी ( जिसको वेदों का ज्ञान हो ) बताया गया है | मैत्री स्त्री शिक्षा के महत्व के रूप मे एक मिशाल है जिसने गृहस्थ जीवन जीने के साथ साथ अध्यात्मिक ज्ञान को भी प्राप्त किया और आजीवन अध्यनन मनन में लीन रही | बृहदअरण्यक उपनिषद् में इनको महर्षि याज्ञवल्क्य की पत्नी बताया गया है वही महाभारत में इनको आजीवन ब्रह्मचारिणी बताया गया है जिन्होंने जनक को अद्वैत दर्शन के बारे में बताया था| बृहदअरण्यक उपनिषद् में मैत्री का वर्णन :- ऋषि याज्ञवल्क्य का वर्णन बृहदअरण्यक उपनिषद् में कई प्रसंगों में मिलता है उनका गगरी और मैत्री के स्थ हुआ संवाद काफी दिलचस्प है जिसमे आत्मा और ब्रह्माण्ड को जानने का वर्णन है | ऋषि याज्ञवल्क्य सुलभ मैत्री ( ऋषि मैत्री की पुत्री ) और कात्यायनी ( ऋषि भारद्वाज की पुत्री )...
कालिया नाग और भगवान श्रीकृष्ण कथा ( एक नई सोच ) / कालिया नाग मर्दन Krishan Leela
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महिषासुरमर्दिनी श्लोक / महिसासुरमर्दिनी श्लोक हिंदी अर्थ सहित / अयि गिरी नन्दिनी
By Komal
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महिषासुरमर्दिनी श्लोक हिंदी अर्थ सहित और इसके वाचन के लाभ महिषासुर मर्दिनी श्लोक देवी पार्वती के दुर्गा अवतार को समर्पित है इसमें देवी पार्वती के द्वारा महिषासुर नामक राक्षस का मर्दन करने के कारण उनकी स्तुति की गयी है| यह का 21 श्लोको का संग्रह है जिसमे देवी दुर्गा ने जिन असुरो को मारा था उनका वर्णन है| इसकी रचना आदिगुरू शंकराचार्यजी ने की थी | महिषासुर को वरदान मिला था कि देवता और दानवो में उसे कोई पराजित नही कर सकता था उसने देवतओं के साथ युद्ध में देवताओ के साथ साथ त्रिदेवो को भी पराजित कर दिया था| तब सभी देवतओं और त्रिदेवो ने मिलकर एक ऐसी स्त्री का निर्माण किया जो अत्यंत शक्तिशाली हो और जिसमे सभी देवतओं की शक्तिया समाहित हो इस तरह दुर्गा का जन्म हुआ| देवी दुर्गा अपनी दस भुजाओ में सभी देवो के दिए अस्त्र लिए हुए है जिसमे भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र, शिवजी का त्रिशूल, ब्रह्माजी का कमल इंद्र का वज्र आदि शामिल है | देवी दुर्गा ऐसी शक्तिशाली स्त्री है जिसमे सभी भगवानो के तेज और शक्तियों को सहन करने की ताकत है जो किसी भी असुर को धराशायी कर सकती है ...