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योगिनी एकादशी 2023 योगिनी एकादशी व्रत का महत्व और इसकी कथा

  योगिनी एकादशी हिंदू कलेंडर में ग्यारहवी तिथि को एकादशी कहा जाता है| हिंदू कलेंडर में दो पक्षों (शुक्ल और कृष्ण) जो 15 दिन के होते है मिलकर एक महिना या माह बनाते है इस तरह एक माह में दो ग्यारहवी तिथि हो जाती है एक कृष्ण पक्ष की और एक शुक्ल पक्ष की| साल में 24 एकादशी होती है और उनके नाम अलग अलग है और उसी अनुसार इसके पूज्य देवता भी बदलते रहते है | इस दिन चंद्रमा हमे अपने पूर्ण स्वरूप से 3/4 घटा हुआ या बढ़ा हुआ दिखाई देता है| हिंदू धर्म में इस दिन व्रत या उपवास करने का बहुत अधिक महत्व है| इस दिन सात्विक भोजन खासकर फलाहार लिया जाता है और जागरण किया जाता है | व्रत करने से हमारे हमारे शरीर का पाचन तंत्र तो दुरस्त होता ही है साथ जैसे की उपवास का मतलब होता है ‘समीप बैठना ’ हम अपने अपने आप को उस परमपिता के ज्यादा नजदीक पाते है | इस दिन किये हुए व्रत से हमारे द्वारा हुए जाने अनजाने पापो से हमे मुक्ति मिलती है|   योगिनी एकादशी वैसे तो तभी एकादशियो का अपना अलग महत्व है लेकिन आज हम जिस एकादशी के बारे में बताने जा रहे है वो योगिनी एकादशी है इस दिन श्रीहरि भगवान की पूजा की जाती ह...

Phulera Dooj फुलेरा दूज 21 फरवरी 2023 जाने तिथि, शुभ मुहूर्त और इस दिन का महत्व ( राधाकृष्ण )

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  फुलेरा दूज 21 फरवरी 2023 जाने तिथि, शुभ मुहूर्त और इस दिन का महत्व   फुलेरा दूज :- हिंदू धर्म के भारतीय कलेंडर या पंचांग के अनुसार फुलेरा दूज का बहुत महत्व है| हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को फुलेरा तीज मनाई जाती है | यह त्यौहार उत्तर भारत के सभी इलाको ज्यादातर बृज, मथुरा और वृन्दावन में मनाया जाता है| यह त्यौहार भगवान कृष्ण और राधा को समर्पित है| यह त्यौहार बसंत पंचमी और होली के बीच में पड़ता है| फुलेरा का मतलब है फूल | इस दिन लोग भगवान कृष्ण के मंदिरों में जाकर उनको फूलो से सजाते है और इस त्यौहार को फूलो की होली भी कहते है क्योंकि इस दिन फूलो से होली खेली जाती है | यह त्योहारों प्रकृति के उपहारों के प्रति धन्यवाद देने का भी प्रतीक है क्योंकि इस समय सर्द ऋतु खत्म होकर ऋतु वसंत आरम्भ हो चुकी होती है और चारो तरफ हरियाली होने लगती है फूल आने लगते है| इस दिन घरो के बाहर फूलो की रंगोली बनाई जाती है | वृन्दावन और मथुरा के मंदिरों में होली की तैयारी शुरु हो जाती है भगवान को अबीर और गुलाल चढाया जाता है| फुलेरा दूज को पूरा दिन शुभ होता ह...

Maha Shivaratri ka mhtav महाशिवत्रि का उपवास कथा और महत्व

महाशिवरात्रि   वैसे तो शिवरात्रि साल में 12 होती है लेकिन हिंदू त्यौहार शिवरात्रि साल में दो ( सावन और फाल्गुन/माघ माह ) बार मनाया जाता है जिसमे फाल्गुन/माघ चतुर्दशी माह वाली शिवरात्रि को ज्यादा शुभ महाशिवरात्रि कहते है| हिंदू त्योहारों में ये दिवाली की ही तरह रात को मनाया जाने वाला त्यौहार है| पुरानी कथाओ के अनुसार इस दिन सृष्टी का आरम्भ भगवान शिव के अग्निलिंग के उदय से हुआ था और इसी दिन भगवान शिव का विवाह माता पार्वती के साथ हुआ था अर्थात प्रकृति और पुरुष का मानव की भलाई के लिए एक होना | माता सती की मृत्यु के शोक में इसी रात भगवान शिव ने तांडव नृत्य किया था इसीलिए 12 शिवरात्रियो में इस रात को महाशिवरात्रि कहा गया है | इस रात को लोग उपवास , जागरण करते है , शिव चालीसा की स्तुति करते है | उप का मतलब है पास और वास का मतलब है जाना या रहना अर्थात भगवान के पास जाना उसका चिन्तन करना | शिवरात्रि का महत्व :- महाशिवरात्रि का वर्णन बहुत से पुराणों जैसे स्कन्द पुराण , लिंग पुराण और पद्मा पुराण में मिलता है| समुंदर मंथन के समय अमृत के साथ हालहल विष भी निकला था जो पुरे ब्रह्मांड को समाप्...

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